आज टिकैत उरांव सिंह और शेख भिखारी का शहादत दिवस मनाया गया।

आज टिकैत उरांव सिंह और

 शेख भिखारी का शहादत 

दिवस मनाया गया।



शनिवार को अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव अध्ययन केंद्र बड़कागढ़ के तत्वधान में हटिया स्थित शहादत स्मारक स्तंभ के प्रांगण में प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (सिपाही विद्रोह) 1857 को खटंगा के जमींदार टिकैत उमराव सिंह और शेख भिखारी का शहादत दिवस मनाया गया । समारोह की अध्यक्षता अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी ठाकुर नवीन नाथ शाहदेव ने किया । श्री शाहदेव ने दोनों वीर सपुतों के पराक्रम पर प्रकाश डाला, कहा कि देश अपना 75वॉ अमृत महोत्सव मना रहा है आज देश के इन दोनों वीरों ने भारत माता को फिरंगियों के चंगुल से मुक्त कराने हेतु शंखनाद किया। इन दोनों वीर बांकुुुुड़ो द्वारा अंग्रेजी शासन की ईटे हिला कर रख दिया था ।

इन दोनों वीरों ने बड़कागढ ईस्टेट के राजा ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के नेतृत्व में अंग्रेजी साम्राज्य में त्राहिमाम मचा दी थी । फिरंगीओं का कमिश्नर ई टी डाल्टन इन वीरों के खौफ से बगोदर होते हुए मेदनीनगर (डाल्टनगंज) में छिप गया । इन वीरों ने शपथ ली थी कि हम अपनी वतन से अंग्रेजी साम्राज्य को उखाड़ फेंकेंगे तब ही हमें चैन मिलेगी या हंसते-हंसते अपने को देश के लिए बलिवेदी पर समाप्त कर देंगे । यही हुआ 8 जनवरी 1858 इन वीरों को फिरंगियो ने पकड़कर चुटुपालु घाटी स्थित बरगद के डाली से लटकाकर फांसी दे दी । 7 दिनों तक इनका मृत्यु देह पेड़ पर टंगा रहा । अंग्रेज अपने कृत्य से सर्वत्र खौफ फैलाना चाहते थे, ताकि अंग्रेजी हुकूमत के आगे क्रांतिकारी झुके। इन वीरों ने यूनियन जैक जहां भी पाये उखाड़ फेंका और बड़कागढ़ ईस्टेट का केसरिया पट्टा फहरा दिया था । ऐसे वीर सपूतों की वजह से ही हमें आजादी मिली परंतु यह आजादी का सुख भोग आज भी अंग्रेजों से हाथ पर हाथ मिलाकर चलने वाले लोगों द्वारा सत्ता सुख भोगा जा रहा है । इन अमर वीरों का परिवार, गांव उपेक्षा का दंश झेलने पर मजबूर है । इनके बच्चों को रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा देने की बातें पिछली सरकार और वर्तमान सरकार आश्वस्त करती आई है , परंतु यह आज भी कोरा आश्वासन बनकर ही है । इनके गांव को आदर्श ग्राम बनाने की घोषणा भरा पड़ा है ।

झारखंड के तमाम स्वतंत्रता सेनानीयों के परिवार के समग्र विकास के लिए झारखंड सेनानी कोष संचालन समिति का गठन सन् 2005 में हुआ । झारखंड सरकार ने 5 करोंड़ रुपए कोष को दिया । वह बैंक की शोभा बढ़ा रही है । आज यह कोष मृत्य प्रायः रह गयी हैं । अध्ययन केंद्र झारखंड सरकार से मांग करती है कि कोष का पुनर्गठन हो और झारखंड के तमाम स्वतंत्रता सेनानी के वंशजों को इसमे सदस्यता दी जाए ताकि झारखंड सरकार को शर्मिंदा नहीं होना पड़े और देश में झारखंड के वीर शहीदों उचित सम्मान मिल सके ।

इन वीर बांकुरो ने त्याग,बलिदान देकर जिस देश की आजादी के लिए कुर्बानी दी उसे आज हम बुद्धिजीवी भूल गए हैं ,यह हमारा दुर्भाग्य नहीं तो क्या है ? रांची के चौक - चौराहों का नाम अमर सेनानियों के नाम पर करने की बात थी । स्कूली पाठ्य पुस्तकों में इनके वीर गाथाओं का संकलन होना चाहिए था । उस दिशा में कुछ नहीं किया गया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का नाम अमर सेनानी ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के नाम पर होने का आश्वासन भी पिछली सरकार द्वारा घोषित हुआ था , इस दिशा में भी पहल नहीं हुई ।

आज हम राजनीति कुचक्र का शिकार हो गए हैं ।सेनानियों को जाति संख्या में बांटकर देखा जा रहा है। अर्जुन मुंडा जी के शासनकाल में यह आश्वासन दिया गया कि रांची सेंट्रल जेल में झारखंड के अमर सेनानियों के सम्मान में स्मारक बनाया जाएगा । आज स्मारक का रूप दे दिया गया, परंतु यहां की गैर आदिवासी और आदिवासी को बांटकर स्मारक स्थल में मात्र जनजाति शहीदों को ही प्राथमिकता देकर झारखंड के शहीदों को बांट कर वोट की राजनीति की जा रही है । यह दुर्भाग्यपूर्ण कृत किया जा रहा है ।

श्रद्धांजलि सभा में सर्व श्री सूरज नाथ शाहदेव , अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी ठाकुर नवीन नाथ शाहदेव , परवेज खलीफा, सुमन माली, जय किशन राम , गोगो मुंडा, धीरज लिंण्डा, राजू प्रजापति, सुधांशु शाहदेव ,हरीश चौधरी,मनरखन गंझू , दिनेश सिंह , बिरजू राम, लखन नायक, सुधीर सिंह, सुरेश सिंह , गिरजा शंकर, कैलाश नायक आदि उपस्थित थे ।


उक्त आशय की जानकारी ठाकुर नवीन नाथ शाहदेव

प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी अमर शहीद

ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव एवं

प्रथम सेवक सेवाईत जगन्नाथपुर मंदिर

बड़कागढ़,जगन्नाथपुर,रांची,झारखंड। ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी है।

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