ईद का चाँद नज़र आया

 

ईद का चाँद नज़र आया


31 मार्च 2025 दिन सोमवार को ईद

दारूल क़ज़ा इमारत शारीया राँची

दारुल कजा इमारत शरीया रांची के काजी शरीअत मुफ्ती मुहम्मद अनवर कासमी ने एलान किया है की उन्तीस रम्जानुल मुबारक 1446 हिजरी मुताबिक तीस मार्च 2025 दिन रविवार को रांची व झारखंड सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में शव्वाल उल मुर्करम 1446 हिजरी महीने यानी ईद उल फित्र का चाँद आम तौर पर नजर आया है जिस की तसदीक़ हो चुकी है इस लिये एकतीस मार्च 2025 दिन सोमवार को शव्वाल उल मुर्करम 1446 हिजरी महीने की पहली तारीख यानी ईद उल फित्र का दिन है।

उन्हों ने कहा कि यही फैसला मरकजी दारुल कजा इमारत शरीया बिहार उङीशा व झारखंड फुलवारी शरीफ पटना का है ।

ईद इस्लामी खुशियों 

का त्यौहार है:

 मुफ्ती अनवर कासमी


रांची: ईद उल फितर एक बड़ा इस्लामी त्यौहार है। ईद की खुशी में अपने आस-पड़ोस और मोहल्ले के ऐसे लोगों को ईद की खुशी में शामिल करें जो कमजोर हो, उनकी मदद करें। और उनकी मदद इस अंदाज में किया जाए कि उनकी इज्जत को ठेस ना लगे। ईद इस्लामी खुशियों का त्यौहार है। ईद का त्यौहार पूरी ईमानी बेदारी के साथ मनाया जाए। ईतमिनान व सकून के साथ नमाज के लिए आए और जाएं। इस्लाम के पैगाम को आम किया जाए, और यह कोशिश की जाए कि आप से किसी को तकलीफ ना पहुंचे। ईद में अल्लाह पाक रोजा और तरावी के बदले इनाम से नवाजता है। इसलिए अल्लाह पाक से खूब दुआ करें, ईद की नमाज के बाद दुआ कुबूल होती है। ईद साल का एक बड़ा त्यौहार है। अल्लाह और उसके रसूल ने त्यौहार मनाने का जो तरीका बताया है, उसी तरीके में ईद मनाना है। और उसी से खुशी हासिल करना है। और जो इसमें अपनी मनमानी चलाएं और नई बातों को जोड़ें उसको ईद की रूहानी खुशी हासिल नहीं हो सकती।
मुफ्ती मोहम्मद अनवर कासमी 
दारूल कज़ा इमारत शरिया रांची

ईद नफरत को मिटाने

 का नाम है: मौलाना 

तहजीबुल हसन 


रांची: ईद उल फितर लोगों के बीच प्रेम और मोहब्बत को परवान चढ़ाता है क्योंकि यह मिठास पैदा करने वाला परव है हमारे भारत की ईद तमाम देशों से उत्तम है क्योंकि भारत में इस पर्व में सिर्फ मुसलमान ही नहीं हर जात बिरादरी के लोग अपने दोस्ती को और परवान चढ़ाते हैं वैसे यह पर्व ईश्वर अपने बंनदौ से खुश होता है तो वह इनाम देता है ईश्वर के इनाम देने का पाक पर्व है इस्लाम धर्म का यह हुकुम है कि हम आपस मैं मिलजुल कर एकता और अखंडता को मजबूती प्रदान करें आपस में गले मिलकर शिकवे को दूर करें शिकवे की दीवारें जैसे-जैसे गिरती जाएंगी आपस में प्रेम बढ़ता चला जाएगा मौला अली ने फरमाया है क्या मोमिन के लिए हर दिन ईद है जब किसी ने आपसे पूछा हर दिन ईद कैसे हो सकता है तो आपने जवाब दिया जिस दिन तुमसे कोई गुनाह या पाप ना हो और तुमने किसी का हक ना मारा हो और किसी पर अत्याचार ना किया हो किसी का मजाक नहीं उड़ाया हो तो वह दिन तुम्हारे लिए ईद है। ईद गाना बजाने का नाम नहीं, ईद नफरत को मिटाने का नाम है। आओ हम सब देशवासी हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में है भाई भाई यही वजह है कि भारत की ईद सिर्फ मुसलमान नहीं बल का हर जात बिरादरी के लोग एक दूसरे से गले मिलते हैं और संबंध को मजबूत बनाते हैं आज हमारे देश को नफरतों से बचाना है ईद का पर्व खुशी के साथ मनाना है।
निवेदक: हाजी मौलाना सैयद तहजीब उल हसन रिजवी इमाम खतीब मस्जिद जाफर या रांची।

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