झाखंड संस्कार दीप में आज
प्रेम शंकर साहु की अपनी
बात - आंदोलनकारी साथियों
जोहार !
झारखंड बने लगभग 24 वर्ष गुजर गए परंतु इस राज्य में ना स्थानीय नीति बना और नहीं अलग राज्य के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों के हित में कोई निर्णय हुआ है।
झारखंड बनने के 12 वर्ष बाद अर्जुन मुंडा की सरकार ने आंदोलनकारियों के पहचान के लिए एक "झारखंड आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आयोग " का गठन किया।उस आयोग के गठन के पूर्व बहुत सरकार आए तथा गए परंतु किसी ने आंदोलनकारी के बारे में सोचने की जहमत नहीं उठाई। आंदोलनकारी आयोग गठित होते समय ही आंदोलनकारी को तीन श्रेणी में बाट कर पेंशन की कैटेगरी तय की गई थी जो आज तक मिल रहा है।
आयोग के वर्तमान अध्यक्ष महोदय, सदस्यगण , आयोग में पदस्थापित पदाधिकारी तथा कर्मचारी के प्रयास के फलस्वरुप आंदोलनकारी के पहचान में गति याई और बहुत सारे आंदोलनकारी चिन्हित कियेऐ
जा सके ।
आंदोलनकारी साथियों ने वर्षों से आंदोलनकारियों के हित में मांगों के लिए धरना ,प्रदर्शन कर संघर्ष करते आए हैं , खासकर पिछले 2019 में चुनकर आए हेमंत सोरेन सरकार से हमें बहुत ही ज्यादा आशा थी की जिस शिबू सोरेन के नेतृत्व में अलग राज्य की मांग जोर पकड़ा उनका बेटा होने का फर्ज हेमंत सोरेन अवश्य ही निभाएंगे । हम लोगों ने विभिन्न बैनरों के माध्यम से विधानसभा सत्र में मांग उठाया है , रैली किया , प्रदर्शन किया ,मानव श्रृंखला लगाया और प्रतिनिधि मंडल मिलकर इस बहरी गूंगी सरकार को विगत 5 वर्षों में याद कराते आये की आपकी फुल मेजॉरिटी की सरकार है ,आंदोलनकारी के हित में कोई अच्छा निर्णय आप ही ले सकते हैं । हम लोगों ने इस सरकार से इसलिए भी ज्यादा उम्मीद किया था की अलग राज्य के आंदोलन में ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन तथा झारखंड मुक्ति मोर्चा के अतिरिक्त झारखंड पार्टी के कार्यकर्ता ही आंदोलन में मुख्य रूप से शिरकत किया था । आंदोलन में भाग लेने वाले कार्यकर्ता आज के दिन झारखंड मुक्ति मोर्चा के बैनर तले सीमट चुके हैं उस लिहाज से भी हम लोगों ने सोचा था की आंदोलनकारी को मान सम्मान , नियोजन तथा पेंशन देकर श्री सोरेन अपने ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को लाभान्वित करेंगे।
इन 5 वर्षों में कुछ समय तो वैश्विक महामारी करोना ने बर्बाद कर दी परंतु उसके बाद के हर विधानसभा सत्र में हम लोगों ने धरना प्रदर्शन के माध्यम से सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रखा और उम्मीद भी किया कि जब अपना पार्टी का हुकूमत है तो निश्चित हीं हम लोगों की मांग़ मान लिया जाएगा । अंत के एक दो वर्ष तो और ही उम्मीद में बीती । हम लोगों ने सोचा की चुनाव में जाने के पूर्व यह सरकार हम लोगों की मांग अवश्य ही मांन लेगी, हम लोग हर सत्र तथा हर कैबिनेट के बैठक में आस लगाकर रहे कि आज तो हम लोगों को मुख्यमंत्री जी अवश्य ही कुछ सौगात देंगे।
आशा देखते- देखते 5 वर्ष बीत गए और चुनाव का वीगुल बज गया , हमारे मुख्यमंत्री जी बिना मांगे किसानों के कर्ज माफ किया,बिजली बिल को शून्य किया , वृद्धापेंशन का उम्र सीमा 10 वर्ष घटकर 50 वर्ष किया , 21 से 50 वर्ष के महिलाओं को 1000 रुपए देकर सम्मान दिया । चंद दिनों बाद उन्हें याद आया की मत देने का अधिकार तो 18 वर्ष से ही है क्यों नही नए मतदाता बहनों को इस योजना से जोड़कर उन्हें भी रिझाया जाय, इसके लिए उन्होंने नियम में संशोधन करके उम्र सीमा को 18 से 50 वर्ष किया । कुछ हफ्तों के बाद मुख्यमंत्री जी को लगा की इस राशि को और बढ़ाना चाहिए तो उन्होंने इस सम्मान राशि को 1000 से बढाकर 2500 रुपए कर दिया , परंतु झारखंड आंदोलनकारी का एक भी नहीं सुना , उनकी मांगों के तरफ उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया ,आंदोलनकारी के 5 साल के धरना , प्रदर्शन , जुलूस , रैली , मानव श्रृंखला सब बेकार चले गए ।आंदोलनकारी जिस सरकार के लिए जिस राज्य के लिए खून पसीना बहाकर अपनी जिंदगी को दाव पर लगाए इस राज्य और इस सरकार ने आंदोलनकारियो को आज घोर अपमान करने का काम किया है ।
मैं एक सीमित ज्ञान का व्यक्ति हूं मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि जब हमारे मुख्यमंत्री इतने उदार हैं , इतने दयालु हैं, की उन्होंने बिना मांगे महिलाओं को सम्मान दिया, उनसे किसी महिला ने उम्र सीमा घटाकर 18 वर्ष करने नहीं बोला फिर भी उन्होंने स्वत: संज्ञान लेकर मईयां साम्मान योजना की उम्र सीमा को घटाकर 18 वर्ष किया , उन्होंने उदारता दिखाते हुए सभी झारखंडियों का 100 यूनिट बिजली फ्री किया , उसके बाद मुख्यमंत्री जी और उदार होते हैं वे 100 यूनिट से बढ़कर अब 200 यूनिट तक बिजली बिल को माफ करते हैं, किसानों को 2 लाख तक का कर्ज़ माफ किया परंतु आंदोलनकारियों पर उन्हें दया
क्यों नहीं आई यह बात मेरे लिए पहेली बन गई है कृपया किसी आंदोलनकारी को इसका ज्ञान हो तो हमें जरूर बताएंगे ।
मैंने कुछ साथियों से इस पर चर्चा किया , मेरे एक साथी ने मुझे बताया की मुख्यमंत्री को दया नहीं आई है सिर्फ वोट का राजनीति कर रहे हैं मईया सामान के नाम पर वे आधी आबादी को साधने का काम कर रहे हैं , झारखंड के खजाना को लूटा कर बिजली बिल माफ किया वे अपना वोट बढ़ा रहे हैं , किसानों को कर्ज माफ कर वे उन्हें अपने तरफ आकर्षित कर रहे हैं अगर उनके पास विकास का कोई रोड मैप होता तो वह झारखंड के विकास के लिए योजना बनाते और उस पर काम करते , खैरात में बांटे जा रहे पैसे को लगाकर झारखंड को सजने संवारने और विकसित करने का काम करते, परंतु उनके पास योजना के अभाव में लोगों को अपने तरफ आकर्षित करने के लिए इस खैरात को बांटने के सिवा और कोई रास्ता नहीं था , कोई प्लान नहीं था और दूसरी बात यह कि वे झारखंड का विकास भी नहीं चाहते। अगर वे झारखंड का विकास चाहते तो जनता का खून पसीने की कमाई को योजनाबद्ध तरीके से खर्च कर झारखंड के विकास में लगाते ।
मैं भी उस साथी से पूछा कि अगर वह खैरात ही बांट रहे हैं तो आंदोलनकारियो को मान सम्मान ना सही कुछ खैरात ही दे देते!तब उन्होंने कहा देहात में अर्ध पालतू कुत्ता देखे हैं, हम आन्दोलनकारी उसी " अर्ध पालतू कुत्ते " की तरह बन गए हैं, कितनो मारो पीटो और भगाओ कुछ देर बाद मालिक के सामने पूछ हिलाते नजर आयेंगे! उन्होंने कहा देखना ये जो आंदोलनकारी अपमानित महसूस कर रहे हैं चंद दिनों बाद कैसे बेशर्मी से हेमंत सोरेन के लिए वोट मांगते नज़र आएंगे।
साथीयों मेरे समझ में कुछ नहीं आ रहा है मैं क्या करूं क्या नहीं करूं अगर हो सके तो आप इस पर गहन चिंतन मनन कर हमें मार्ग दर्शन देने का कृपा करेंगे ।
जोहार: प्रेम शंकर साहु।

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