पद्म श्री मधु मंसूरी "हंसमुख" इसबार मुड़मा मेला मे भागीदार नहीं होंगे

पद्म श्री मधु मंसूरी "हंसमुख"

 इसबार मुड़मा मेला मे 

भागीदार नहीं होंगे



रांची: प्रेम शंकर साहु की रिपोर्ट: मधु मंसुरी हंसमुख " पद्म श्री" इस बार मुड़मा मेला जतरा में अपनी भागिदारी नही देंगे, एसा क्यों ? इसपर स्थानीय लोगों एव प्रशासनिक अधिकारियों को जानना और समझना चाहिये,साथ हीं सदान वर्ग के संस्कृतिक परंपरा पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा ,यह सोचने की बात है । पद्मश्री मंधुमंसुरी वर्षों से मुड़मा जतरा नागपुरी गीत संगीत से मेला का शोभा बढ़ाते आरहे है लेकिन वर्तमान समय में सरकार और पड़हा समाज के गुरु बंधन तिग्गा द्वारा पद्मश्री मधु मंसुरी हंसमुख को कार्यक्रम के उपरांत रूपयों का भुगतान नहीं किया जाना और कर्ज के बोझ मैं दबे होंने की बात प्रकाश में आई ,यह बहुत हीं दुखत है , राज्य के मानिंद व्यक्ति विशेष का भी यहां शोषण होता है तो साधारण व्यक्ति पर क्या होता होगा ? किन्तु बहुत दुःखद समाचार यह है कि जिन महानुभाओ ने झारखंड राज्य को प्राप्त करने में अपनी जवानी दे दी और झारखंड राज्य की पहचान

संस्कृति और भाषा के आधार पर हुआ है तथा अपनी संस्कृति कि रक्षा गीत- संगीत से करते आ रहे है, वहां के संस्कृति प्रेमी के साथ ऐसा व्यवहार सोचनीय है? जिस मेला को राज्य में पहचान दिलाने में पद्मश्री मधुमसुरी हंसमुख ने कितने त्याग,समय दिये ।आज मुड़मा जतरा एक समुदाय विशेष पर प्रभाव दिखा रहा है , सदान वर्ग को दरकिनार कर दिया जा रहा है ,यह भी सवाल रहेगा । इसे सभी वर्ग को जोड़ने वाला भाषा संस्कृति नागपुरी पर भी आघात माना जा सकता है? धर्म गुरु बंधन तिग्गा को यह सोचना होगा कि इससे आने वाले समय पर कितने सवालिया निशान खड़े होगे । पद्मश्री मधुमंसूरी हंसमुख ने बताया कि वे बिना शुल्क 1960 ई से मंच निमार्ण करके संस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते आ रहे है, और मुड़मा जतरा को शोभायमान करते आ रहे है। लेकिन आज धर्म गुरु और सरकार के उदासीन रवैया के कारण पद्मश्री मधु मंसुरी हंसमुख को उपेक्षित किया जा रहा है जिससे वो भी अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे है जो निंदनीय है।

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